Monday, 20 January 2014

ग्राम जीवन

 

आहा ग्राम जीवन भी क्या है 

क्यों न इससे सबका मन भाये । 

थोड़े  में निर्वाह यहाँ है 

ऐसी सुविधा और कहाँ है । 

यहाँ शहर की बात नहीं 

अपनी अपनी घात नहीं । 

यहाँ गटखते चोर नहीं 

तरह तरह कि शोर नहीं । 

गुण्डों कि न यहाँ बनाती 

ईज्जत नहीं किसी की जाती । 

सीधे साधे  भोले भाले 

हैं ग्राम जीवन मनुष्य निराले । 

एक दूसरे की ममता हैं 

सब में प्रेममयी समता हैं । 

यद्दपि वो काले हैं तन से 

 पर  अति हैं उज्जवल मन से । 

अपना यह मिट्टी  का घर है 

गोपट चिन्हन आँगन तट  हैं 

रखे एक ओर जलघट हैं । 

खपरैलों  पर हैं बेलें छायीं 

फूलें फलें हरी मन भायीं 

काशी फल कुसमाण्ड कहीं है 

कहीं लौकियाँ लटक रही है । 

है जैसा गुण यहाँ हवा में 

प्राप्त नहीं डॉक्टरी दवा में । 

संधया समय गाँव के बाहर 

होता नंदन विपिन निछावर । 

अतिथि कहीं जब आ जाता है 

ठहराया जाता है जैसे 

जैसे कोई सम्बंधी हो ऐसे । 

शिक्षा का प्रकाश यदि होता 

बहता बिमल बुद्धि का रोता । 

तो ग्राम स्वर्ग बन जाते 

पूर्ण शांति में सम  जाते ।। 

 






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On demand of viewers, I am posting the Hindi poems in Hindi. Poem ref: Graam Jeevan
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3 comments:

  1. Replies
    1. Hello sir I need this Hindi poem meaning in English

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    2. Hi, The poem describes the peaceful life of village where the the air, vegetation and animals and simple and happy life of villagers.

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