एक हार था बड़ा अनमोल
थी उसमें कच्चे धागे की जोड़ ।
एक वृक्ष से लटका था वो हार
एक हवा का झोका आया
गीरा डाला उसे पहली बार ।
सारी बहुमूल्य मोतियाँ बिखर पड़ी
और करने लगी इंतज़ार किसी राही का
जो जोड़ दें उन्हें मज़बूत डोर में
और हो जाये वो परिवर्तित एक
सुन्दर बहुमूल्य हार के रूप में ।
----shilchan