Friday, 7 March 2014

नारी की आवाज़

यह कविता मैंने नवमी कक्षा में लिखी थी । 
अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष में,  मैं मेरी यह कविता सभी महिलाओं' को समर्पित करती हूँ । 

I wrote this poem when I was in ninth standard.
On the eve of International Women's Day ( March 8th) , I dedicate this poem to all the women.



आज की नारी नहीं है चुप 

सह सकती है सारे दुःख 

लेकिन समाज का अत्याचार नहीं 

यह इसका विचार है सही । 

  

गया वो पल , गए वो दिन

जब नारी ने चुप्पी साधी थी 

 परदे में जब वो रहती थी 

तब वो एक गुलामी थी । 

 

नए युग कि नयी है नारी 

अब उन लोगों के चुप रहने कि बारी 

नारी का जो सम्मान नहीं करते 

वही हैं असली अत्याचारी । 


अब नारी है जाग उठी  

चुप नहीं है और न है रूठी   

अधिकार हेतु लड़ना इसने सीख लिया 

अदभूत सा यह कर्म किया । 

 


कल्पना की  हुई जब अंतरिक्ष में उड़ान 

हिल गया संपूर्ण ब्रह्माण्ड 

अंजलि ने जब साधा निशाना'

हो गयी पूरी विश्व हैरान । 




लता , माधुरी , सुषमा , लारा 

हैं हमारे देश की तारा 

जब नारी इस देश की शान है

  तब हमारा देश महान है ।। 

 

---shilchan


Few pictures are taken from the coming bollywood movie Gulaab Gang.