यह कविता मैंने नवमी कक्षा में लिखी थी ।
अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष में, मैं मेरी यह कविता सभी महिलाओं' को समर्पित करती हूँ ।
I wrote this poem when I was in ninth standard.
On the eve of International Women's Day ( March 8th) , I dedicate this poem to all the women.
आज की नारी नहीं है चुप
सह सकती है सारे दुःख
लेकिन समाज का अत्याचार नहीं
यह इसका विचार है सही ।
गया वो पल , गए वो दिन
जब नारी ने चुप्पी साधी थी
परदे में जब वो रहती थी
तब वो एक गुलामी थी ।
नए युग कि नयी है नारी
अब उन लोगों के चुप रहने कि बारी
नारी का जो सम्मान नहीं करते
वही हैं असली अत्याचारी ।
चुप नहीं है और न है रूठी
अधिकार हेतु लड़ना इसने सीख लिया
अदभूत सा यह कर्म किया ।
कल्पना की हुई जब अंतरिक्ष में उड़ान
हिल गया संपूर्ण ब्रह्माण्ड
अंजलि ने जब साधा निशाना'
हो गयी पूरी विश्व हैरान ।
हैं हमारे देश की तारा
जब नारी इस देश की शान है
तब हमारा देश महान है ।।
---shilchan
Few
pictures are taken from the coming bollywood movie Gulaab Gang.






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