सुन रे लड़की
तू न मुरझाना
क्यों कली बनी तू
तू खिलजाना ।
तुझको है आज
सुगंध फैलाना
अपना पराग फूल बन
दूसरों तक पहुचना ।
तू कर सकती है
उनका नाश
जिन्हें नहीं तेरे
सुगंध का आभास ।
हाँ तेरे में
माता शक्ति का वास
बस तुझे होना
इसका ऐहसास ।
तू नयी सुबह
क्या देख रही
बस आज
अभी खिलजा ।
क्यूँ काली बन
अंदर ही अंदर घुट रही
फूल बन
अपने तेज़ को फैला ।
अगर कोई तुझे
मोड़-मचोड़
मचता है
अपने अपने सुख का शोर ।
तब तू अपने
काँटों द्वारा
कर सकती है उनके
धीरज को तोड़ ।
हाँ अभी सूर्य है
इस दुनियां में
जो दे सकता है
तुझको रौशनी ।
बस तू खिलजा
और चारों ओर
अपने सुगंध
को फैला । ।
----shilchan
Poem reference: Ladki





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